Tuesday, September 27, 2011

आज मुझे माँ ! गाओ ... गीता पंडित



...
....


मेरे मन के 
प्रांगण में भी
भाव सुमन भर लाओ,
मैं नित-नित 
गाती हूँ तुमको
आज मुझे  माँ ! गाओ


शंख नाद के 
पावन भावों
सी भर आये मेरी लेखनी,
सत्यं शिवं 
सुंदरं बनकर
जनमन कथा सुनाये लेखनी,
वीणा पाणी 
मात शारदे !
ऐसा वर ले आओ |


मैं नित-नित 
गाती हूँ तुमको
आज मुझे  माँ ! गाओ |


लिखी सूर की 
तुमने पाती
बनीं कबीर की भाषा सादी,
बाँची तुलसी 
की रामायण
कालीदास को आयीं गाती ,
रुद्ध कण्ठ है 
अधर हैं कंपित
सुर सरिता लहराओ  |


मैं नित-नित 
गाती हूँ तुमको
आज मुझे माँ ! गाओ |


 तुमको गाती 
आयी युगों से
कब गाने मैं पायी.
तुम ही मात्रा 
अक्षर बिंदु कब
वर्ण समझ मैं पायी, 
बरसें नयना हर पल मेरे
गीतों में ढल आओ ।



मैं नित-नित 
गाती हूँ तुमको
आज मुझे माँ ! गाओ ||



गीता पंडित 

23 comments:

गीता पंडित said...

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Prabhat Pandey

सत्यम् शिवम् सुंदरम् ..... शुभकामना आप सब को.

गीता पंडित said...

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Ravindra K Das

गहरे भक्ति-बोध की कविताएँ हैं......

गीता पंडित said...

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Kavi Arjun Alhad

जय माता दी
गीता दीदी
अति उत्तम..!

गीता पंडित said...

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Ashok Aggarwal

मेरे मन के अंध तमस में,
ज्योतिर्मयी उतारो॥.....Didi apko bhi Navratr ki hardik shubhkaamnaye.

गीता पंडित said...

"हम और हमारी लेखनी" की तरफ से सभी मित्रों को और सभी मित्रों की लेखनी को मंगलकामनाएं...

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही खुबसूरत....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुन्दर कामना ...

वन्दना said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।माता रानी आपकी सभी मनोकामनाये पूर्ण करें और अपनी भक्ति और शक्ति से आपके ह्रदय मे अपनी ज्योति जगायें…………सबके लिये नवरात्रि शुभ हो॥

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत खूब ..बेहतरीन

गीता पंडित said...

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Praveen Pandit

कितनी भावपूर्ण है यह विनती कि माँ आज स्वयं मुझे गाये | आदिश्वरी माँ लेखनी को सामर्थ्य और स्वयं को संबल देती रहे |

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

वाह दी! बहुत सुन्दर प्रार्थना है...
नवरात्र की सादर बधाईयाँ...

अनामिका की सदायें ...... said...

waah aaj bhakt bhagwaan ki pareeksha par utar aaya hai...waise jab jab aisa hua bhakt kabhi nirash nahi hua.

aapki dua b jaroor puri hogi.

sunder nirmal prastuti.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया!
आपको सपरिवार
नवरात्रि पर्व की मंगलकामनाएँ!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 29 -09 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में ...उगते सूरज ..उगते ख़्वाबों से दोस्ती

सदा said...

भावमय करते शब्‍दों का संगम है मां का यह वंदन ..बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बेहतरीन।

सादर

रेखा said...

सुन्दर प्रस्तुति ...नवरात्रि की शुभकामनाएँ

रेखा said...

सुन्दर प्रस्तुति ...नवरात्रि की शुभकामनाएँ

गीता पंडित said...

आभारी हूँ आप सभी की मित्र ..
मंगलकामनाएँ ..

गीता पंडित said...

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Jeewan Soni

Gita ji, jabtak aap jaise log salaamat hain Hindi bhasha ka gaurav hamesha salaamat rahega. Jai Mata ki

daanish said...

भाषा की गरिमा को समर्पित
प्रभावशाली कृति ... !

Rajni Mandaliya said...

गीता जी इसमैं जो भाव आपने डाले हैं
सब आज मेरी आँखो से निकले है !!!!
बहोत बहोत धन्यवाद आपको और बधाइ!!!!!

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...






आदरणीया गीता पंडित जी
सादर सस्नेहाभिवादन !

आनंद परमानंद की अनुभूति हुई आपके यहां आ'कर…
वाह वाऽऽह! कितना अलग ,कितना गरिमामय लिखा है आपने-

मेरे मन के प्रांगण में भी भाव सुमन भर लाओ,
मैं नित-नित गाती हूँ तुमको आज मुझे माँ ! गाओ |

शंख नाद के पावन भावों सी भर आये मेरी लेखनी,
सत्यं शिवं सुंदरं बन कर जन मन कथा सुनाये लेखनी,
वीणा पाणी मात शारदे !
ऐसा वर ले आओ |

लिखी सूर की तुमने पाती बनीं कबीर की भाषा सादी,
बाँची तुलसी की रामायण कालीदास को आयीं गाती ,
रुद्ध कण्ठ है अधर हैं कंपित
सुर सरिता लहराओ |

तुमको गाती आयी युगों से कब गाने मैं पायी.
तुम ही मात्रा अक्षर बिंदु कब वर्ण समझ मैं पायी,
बरसें नयना हर पल मेरे
गीतों में ढल आओ ।



माता सरस्वती के साथ यह विश्वास और अधिकार का रिश्ता अभिभूत कर रहा है मुझे !
बहुत सुंदर रचना के लिए आपको और आपकी पावन लेखनी को प्रणाम!

आभार, बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
- राजेन्द्र स्वर्णकार