Monday, May 4, 2015

फेसबुक पर एक गंभीर चर्चा गीता पंडित की वाल पर


ओह!!! अगर लड़की अपना बचाव करती है तो उसे बस से बाहर फ़ेंक दिया जाता है | भयानक समय जैसे सोचने समझने की शक्ति सारी नष्ट होती जा रही है | स्त्री आधी आबादी और उसके साथ ऐसा दुर्व्यवहार जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है | कुछ भी क्यों नहीं बदल रहा है ?
  • Gyanesh Upadhyay अश्लील साहित्य और अश्लील सिनेमा पर रोक लगानी पड़ेगी जो पढ़े लिखे लोग नहीं हैं इन साहित्य से जादा असर उन्हीं लोगों को पड़ता है ,आम आदमी और समाज की सोच बदलनी होगी हमारा वातावरण पश्चिमी देशों जैसा नहीं है अभी यहॉं ऐसे साहित्य और सिनेमा के लिये वक़्त लगेगा,कितने भी कनून बन जाये जब तक सोच नहीं बदलेगी कुछ नहीं होगा हर दिन एक नयी गुड़िया हर दिन एक नयी दामिनी इनका शिकार बनती रहेंगीं
  • Ramesh Sharma हीन मानसिकता के शिकार होते हैं जो लोग वही यह करते है ृे....
  • गीता पंडित रोक से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा | चोरी चकोरी अधिक बढ़ जायेगी | कहीं न कहीं नैतिकता का हास भी ऐसे कृत्यों को जन्म दे रहा है | घर से लेकर स्कूल तक क्या नैतिक शिक्षा अनिवार्य हो जानी चाहिए Gyanesh जी ...
  • Gyanesh Upadhyay जी.गीता जी आप से बिलकुल सहमत हूँ,पर कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा ए लोग एक क़िस्म के मानसिक रोगी है
  • Anil Vashisth सत्य यही है कि नैतिकता का ह्रास हो रहा है
  • Anil Vashisth स्कूलों से भी अधिक आवश्यक है घर से नैतिक शिक्षा पर ज्यादा जोर दिया जाय
  • गीता पंडित Ramesh जी , Gyanesh जी ...सहमत हूँ लेकिन क्या एसे मानसिक रोगियों का इलाज हमारी सरकार और हमारे समाज के पास नहीं | अब यह मानसिक रोग न रहकर महामारी में बदल गया है
  • गीता पंडित सही कह रहे हैं आप Anil जी..
  • Gyanesh Upadhyay इसके लिये समाज की सोच बदलनी पड़ेगी ए हमारी सब की ज़िम्मेदारी है ,सरकार क़ानून बना सकती है सोच नहीं मुझे आज भी याद है आज के १० साल पहले धनंजय चटर्जी को फाँसी दे दी गयी थी पर उसके बाद क्या हुआ बलात्कार कम हुआ नहीं बल्कि और बढ़ा है...
    पर मैं आप के साथ हूँ क्यू कि मुझे मालुम है आप मुझसे जादा योग्य अनुभवी समझदार और परिपक्व हैं ,
    आप का अनुभव आप की सोच समाज को एक नयी दिशा दे सकती है..
  • Pratibha Bisht Adhikari कुछ भी तो नहीं बदला ....
  • Sudhir Joshi बदलेगा तो और इसे बदलना होगा भी परंतु यह इतना समय क्यों ले रहा है ?
  • गीता पंडित जी ...Sudhir Joshi जी यही प्रश्न मैं अपने आपसे पूछ रही हूँ
  • Ajaay Rohila इसका सिर्फ और सिर्फ एक तरीका है और वो है कठोर दंड
  • Ajaay Rohila और ये लोग जो नैतिक शिक्षा देने की बात करते हैं ,उनसे सिर्फ एक सवाल ऐसी कौन सी नैतिक शिक्षा हैं जो बचपन में ही सब बच्चों को नहीं दी जाती ?क्या उनको ये नहीं बताया गया कि झूठ नहीं बोलना चाहिए या ये नहीं बताया गया कि स्त्री देवी सामान है और उसकी इज्जत करनी...See More
  • गीता पंडित अजय जी ! बहुत जरूरी है कठोर दंड का प्रावधान लेकिन अभी तक भी सियासी गलियारे बेचैन नहीं हुए हैं |
  • Udai Kumar Singh दरअसल यह एक ऐसी सामाजिक समस्या है जो दिशाहीनता और भारतीय समाज में उसके मनोवैज्ञानिक रोगग्रस्ता से संबंधित है । और यह हर तबके में फैला है जो स्री और पुरुष के शरीर को अपने वर्चस्व का कारण समझता है । और इसके पीछे पुरुष वर्ग की ही कमियां सबसे पहले उजागर ...See More
  • DrAshok Maitreya विकृत मानसिकता .....घृणास्पद.....! Mil kar morcha lena hoga...
  • Ajaay Rohila गीता पंडित जी ,सियासी गलियारे कभी बैचेन होंगे भी नहीं ,वो सिर्फ सत्ता के लिए बैचेन होते है ,जिस दिन उनको ये समझ आएगा कि इस तरह के अपराध पर कठोर दंड ना दिए जाने पर सत्ता हाथ से जा सकती है तब होंगे बैचेन वो ,और हो सकता है तब वो कुछ कार्यवाही करना शुरू करें
  • Ajaay Rohila Udai Kumar Singh जी और ये समस्या सिर्फ भारत में ही नहीं है ,अमेरिका नंबर एक पर है और बाकि देशों के पुरुष नंबर एक पर अधिकार करने के लिए जी जान से लगे हुए हैं
  • गीता पंडित इस बात के लिए जनता में जाग्रति की जरूरत है अजय जी | जनता सब जानकर भी अनजान बनी रहती है |
  • गीता पंडित विकृत मानसिकता का ही तो प्रश्न है चाचा जी लेकिन कब तक हमें इसे झेलना होगा | अब तो कम से कम कठोर कदम उठने ही चाहिए DrAshok Maitreya सादर
  • Ajaay Rohila गीता पंडित जानकारी है सबको ,डर नहीं है
  • गीता पंडित जब सरकार कुछ नहीं करती तो समाज करता है | पिछले दिनों जेल से निकालकर ऐसे ही दुर्जन को पब्लिक ने पीट-पीटकर मार डाला लेकिन यह तो अराजकता को बढ़ावा देगा इसलिए सरकारें पहल करें |
  • Hema Awasthi गीता जी ... दंड प्रावधान सब बेकार है हमारे सामाजिक ढाँचे के आगे .... हम ही जिम्मेदार है दो तरह के पालन पोषण के ...ये सब तब बदलेगा जब बेटी बेटा समान रूप से पाले जाएँगे.. बेटे के मन देर रात बाहर घूम सकने का गुमान न होगा और बेटी के मन घर में कैद होने की कुंठा न होगी ....
  • Azher Khan ये समस्या शायद सांस्कृतिक है और कहीं ना कहीं स्वीकृत जीवन दर्शन से जुड़ी है
  • गीता पंडित Azher Khan हाँ यह भी है ... थोड़ा और स्पष्ट करें ...
  • गीता पंडित Hema Awasthi आपसे सहमत हूँ यह भी एक मुख्य कारण है
  • Ajaay Rohila Hema Awasthi जी क्या आप कहना चाहती हैं कि पूरी दुनिया का ढांचा ही गलत है ?
  • Hema Awasthi Ajaay Rohila ji ... मैं ये कहने वाली कौन होती हूँ .... पर ये जरूर है कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था और लड़के व लड़कियों के पालन के दोहरे मापदंडों ने बहुत क्षति पहुँचाई है .
  • डाॅ. रंजिनी पाण्डेय कठोर दंड....hang till death .......They are so disgusting people
  • Ajaay Rohila Hema Awasthi जी माफ़ कीजियेगा ,मैं आपसे सहमत नहीं हूँ ,क्योंकि किसी समय में हम एक मातृसत्तात्मक समाज भी थे ,इसका इलाज सिर्फ एक है और वो है डर ,वरना ज्ञान की बड़ी बड़ी बाते तो सब करतें हैं और अक्सर पाये जाते हैं वो भी बलात्कारी
  • Shomini Parashar change is required at the root level mausiji. From initial years of child learning.
  • गीता पंडित I have told the same in my comment Shomini
  • Ajaay Rohila आप लोग दरअसल बदलाव चाहते ही नहीं हैं ,करेप्शन के लिए भी चेंज लोगो में चाहिए और बलात्कार के लिए भी ,जब सब लोगो को खुद ही करना है तब सरकार और कानून की क्या ज़रूरत ?
  • मिथिलेश व्दिवेदी हर हर महादेव..... ऐसा क्यों सोचती हो, गीता कि कुछ भी क्यों नहीं बदल रहा है? सब कुछ तो बदल गया है - संस्कार, सरोकार, संवेदना, अपनत्व, रिश्ते, नाते, परिवेश, भाई-चारा, उपयोगिता सभी में अब बदलाव आ गया है। देशकाल परिस्थितियों वातावरण-यय-वरण चिंतन सभी कुछ तो...See More
  • मिथिलेश व्दिवेदी अनजान नजर, अनजान प्रहर, अनजान सफर है मेरा यह
    अनजान नगर, अनजान डगर, पर खुद से हूँ अनजान नहीं ।
  • गीता पंडित Ajaay जी परिवार समाज सरकार क़ानून सभी की भागीदारी जरूरी है
  • Gita Dev Shayad logon ki beemar maansikta unhain badle nahi de rahi hai
  • Ajaay Rohila गीता पंडित उनकी भागीदारी के नतीजे सामने हैं
  • Hema Awasthi हर बलात्कार पर फाँसी का प्रावधान भी नही रोक सकता इव टीजिंग और बलात्कार को ... हमे जागरूक शिक्षित और संस्कारी समाज चाहिए तो बदलना खुद को ही होगा
  • Navneet Pandey शर्मनाक
  • गिरीश पंकज दुखद। मुख्यमंत्री की बस् कैसे कैसे गुंडों के हवाले है
  • Sandhya Navodita मुख्यमंत्री की बस नहीं गुंडों के हवाले है !, वहां बादल परिवार से जुड़े हर नाम का रौला है.
  • Mukesh Popli हैरान भी हूं और परेशान भी हूं
  • Rakesh K. Mathur kharaab filmô ka asar hai yeh.
  • Alka Bhartiya जब तक रसूखदार का बोलबाला रहेगा राजनीति में गंदगी की प्रवृत्ति रहेगी । यह ख़त्म हों वाला नहीं है ।
  • Maya Mrig बदले कैसे-- सत्‍ता की सोच तो इस स्‍तर की है कि ऊट पटांग कानून बनाने के फैसले लेती है, कोई सत्‍तामद में डूबा नेता बोलता है कि लड़कों से गलती हो जाती है--- तीसरा कोई बोलता है कि आप तो सुरक्षित हैं ना--- जाइये सबको बताइये-- । गंभीरता से सोचना होगा कि जब राजनीति ही हमारा सब कुछ तय करती है तो हमारी भविष्‍य की राजनीति क्‍या हो----
  • Indrajeet Kaur · 102 mutual friends
    बस नज़रिए और अहं की बात है। कही से ना नहीं सुनने की लत है
  • यह पुस्तक मैंने 'निर्भया' को समर्पित की थी आज भी स्थिति वही है 'अब और नहीं बस' आख़िर कब तक स्त्री के साथ ऐसा दुर्व्यवहार होता रहेगा| | इस सड़ी गली व्यवस्था से अब दुर्गन्ध आने लगी है | हम सभी मिलकर कोई ठोस कदम क्यूँ नहीं उठाते ?? क्या कभी स्त्री का मन पढ़ा है ? देह की भाषा आसानी से समझने वाला समाज अगर स्त्री का मन पढ़ना प्रारम्भ कर दे तो ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है |
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  • Anil Vashisth स्थितियों में परिवर्तन तब तक नहीं होने वाला जबतक कि आप और आप जैसे लेखनी के सिपाहियों की पीड़ा ये समाज समझ नहीं लेता दिल से, सिर्फ प्रशंसा करने तक सीमित नहीं रहता
  • Like · Reply · May 1 at 4:12pm
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  • गीता पंडित जी. लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है । जब सरकार कुछ नहीं करती तो समाज करता है | पिछले दिनों जेल से निकालकर ऐसे ही दुर्जन को पब्लिक ने पीट-पीटकर मार डाला लेकिन यह तो अराजकता को बढ़ावा देगा इसलिए सरकारें पहल करें .जनता में आक्रोश है । बेचैनी है । 
  • Paritosh Kumar Piyush Yaatri · 74 mutual friends
    इसके लिए अगर हम सरकार पर आश्रित रहेंगे तो कुछ होने वाला नहीं है । । हमें इसके लिए सड़क पर उतरना होगा । 
  • गीता पंडित हाँ सही है | लेकिन नारे और भाषण भी हवाई होकर रह जाते हैं |
  • Anil Vashisth सच बात है नारों या भाषणों से भी कुछ नहीं होता.. आत्म चेतना का होना आवश्यक है, नीतिगत संस्कारों का बोध होना आवश्यक है
  • गीता पंडित सही कहते हैं Anil जी लेकिन एक दूसरी सच्चाई भी है जिससे मुँह नहीं मोड़ा जा सकता | वह है परिवारों का न्युक्लियर होना जिसमें पति-पत्नी दोनों ही काम करते हैं इसलिए समय का अभाव और घर में दादी नानी बुआ कोई भी साथ नहीं तब अधिकतर बच्चों का नौकरों के साथ समय व्यतीत होता है | वहां से वे कितना और कैसा ग्रहण कर पाते हैं यह भी देखना होगा | नीति मिले कहाँ से दादी नानी के किस्से कहानी अब बच्चों को मिल नहीं पाते
  • Anil Vashisth जी बिलकुल
    ये भी एक बहुत बड़ा कारण है
    पर कुछ सार्थक करने की जरूरत है क्योंकि अब कौन सुरक्षित हो सकता है इसतरह के माहौल में
  • गीता पंडित जी ... यही तो एक प्रश्न है जो बारम्बार उठ रहा है |
  • गीता पंडित Anil Vashisth जी , सच बात तो यह है कि घर से लेकर बाहर तक या कहूँ कि विश्व स्तर पर एक व्यापक आन्दोलन की ज़रुरत है |
 
        गीता पंडित
        gieetika1@gmailcom. 

1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (06-05-2015) को बावरे लिखने से पहले कलम पत्थर पर घिसने चले जाते हैं; चर्चा मंच 1967 पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
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