Sunday, September 16, 2012

"इला त्रिवेणी सम्मान 2012' ( इलाहाबाद बैंक ) द्वारा मुझे दिए जाने पर .. आभार ... गीता पंडित


 

                 Om Nishchal बधाई। एक बड़ी सार्वजनिक संस्‍था का यह सम्‍मान किसी भारतभूषण अग्रवाल या शमशेर सम्‍मान से कम नही है। इसलिए कि इसमें कोई राजनीति नही है। और जिस मंच पर जयप्रकाश कर्दम जैसे सुधी रचनाकार हों वह मंच यों ही समादर का केंद्र होता है। बैंक प्रबंधन को साधुवाद ( टिप्पणी अंजू शर्मा के कमेंट्स में से साभार )

आभार  सर (Om Nishcha जी )  मैं 'जयप्रकाश कर्दम' जी के नाम से इसी कार्यकर्म में परिचित हुई ... पत्नी की अस्वथता के कारण कर्दम जी तब आये थे जब मैं अपने कविता पाठ के लियें मंच पर गयी ... मैंने अपना पाठ पूरा किया और कर्दम जी माईक पर आये  क्यूंकि उन्हें तुरंत वापिस अस्पताल जाना था .....

उन्होंने जो भी कहा वो हमेशा के लियें मेरी स्मृतियों का हिस्सा बन गया  ... और मेरी लेखनी के लियें विशेष प्रेरणा भी .... मेरी तरफ इंगित करके कुछ इस तरह कहने लगे  कि आपने इतने सुंदर सरस नवगीत और मुक्तक सुनाये कि मैं सुर में खो गया और यह भी भूल गया कि पत्नी अस्पताल में भर्ती हैं | मेरे अंदर का कवि फिर से जाग्रत हो गया  .... आप तो लेपटोप से सुना रही थीं ... लेकिन हम क्या करें .  अब याद भी नहीं रहतीं अपनी कवितायें ....और उन्होंने अपनी सुंदर कवितायें सुनाईं ...  मैंने नतमस्तक होकर करबद्ध करके उनका आभार प्रकट किया..  अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे ही ..... आभार ...

आप सभी मित्रों की बधाई व शुभ कामनाओं के लियें हृदय से आभारी हूँ ...  और  आभारी हूँ  सर Rajeshwar Vashistha  जी की जिनसे मेरा पूर्व परिचय कुछ नहीं था केवल फेसबुक पर लेखन ही आज इस संपर्क का माध्यम बना |  आपने मुझे आमंत्रित किया कविता पाठ के लियें व सम्मान के लियें ,,, सच कहूँ तो मैं इस समय एक माह से वायरल से जूझ रही थी मेरा गला खराब था और पिछले  दो दिन से मेरे बेटे को तेज बुखार था ....  बहुत उदास थी ... लेकिन वहाँ  आपके स्नेह और सभी भाषा अधिकारियों के हिंदी भाषा के प्रति अति-लगाव ने विशेष उत्साहवर्धन किया और मैं सबकुछ भूलकर उस वातावरण में डूब गयी .. ...  :) बहुत समय बाद लगा कि मैं आज कुछ पल जी पायी .. ' इला त्रिवेणी पुरस्कार ilइलाहाबाद बैक 2012 'के  सम्मान के लियें मैं हृदय से आभारी हूँ ... और उस अवसर के लियें भी जो  कविता पाठ का ऐसा सुंदर अवसर भाषाविदों के सम्मुख आपने मुझे मिला ....   :) शुभ-कामनाएँ 

सभी बैको के अधिक से अधिक भाषा-अधिकारी वहाँ उपस्थित थे  उनके विचार और रचनाएं सुनकर अभी तक अभिभूत हूँ ... कई अधिकारियों से बातें करने का अवसर भी मिला .. सौभाग्य मेरा.... जो छंद को सराहा गया ... पसंद किया गया.... और र्राजेश्वर वशिष्ठ जी के शब्द... कविता थोडी सी बची हुई गीता पंडित के गीतों में देखी जा सकती है ...... आभार ....  'नवगीत' के लियें हमारे प्रयास सही दिशा में हैं इस बात का भान यहाँ आकर विशेष रूप से हुआ पूर्णिमा दी ! ..... :) ...

सभी की कवितायों ने आकृष्ट किया .... मन मोह लिया  ... बधाई सभी रचनाकर्मियों को और अनंत शुभ-कामनाएँ ..

विशेष ___ 'स्वर्गीय श्री मदन शलभ' गीतकार (मेरे पापा) की स्मृति के लियें  मैं विशेष रूप से राजेश्वर वशिष्ठ जी की हृदय की अंतरंगता से आभारी हूँ और उस स्नेह के लियें भी जब उन्होंने आग्रह किया कि आप अपने पापा का गीत अवश्य सुनाएँ .... मेरी  आँखें नम हो गयीं थीं कंठ भर्रा गया था .... मन ही मन मैंने पापा को नमन करके जब उनके चार मुक्तक और एक गीत सुनाया .... सभी ने मुक्त-कंठ से सराहा .....| उसके बाद ही अपने मुक्तक और नवगीत सुनाये... ..आभार ....  

 अंत में विशेष ____ पिछले काफी दिनों से हिंदी लेखक की दयनीय दशा को देखकर मन बहुत पीड़ित था ... यहाँ ग्रह-मंत्रालय के भाषा-अधिकारी भी उपस्थित थे ... मैंने इस दयनीय दशा को उनके तथा विभिन्न बैंकों से आये हिंदी भाषाविदों के सम्मुख रखा और करबद्ध प्रार्थनी की कि हिंदी लेखक को इस पीड़ा से मुक्त करने के लियें जो भी प्रयास किये जा सकते हैं वे सभी मिलकर करें .... बिना किसी राग-द्वेष व राजनीति के ....

ऐसे आयोजन होते रहें क्यूंकि हिंदी को अपाना सही स्थान दिलाने के लियें अभी बहुत परिश्रम करना आवश्यक है ... आईये कड़ी से कड़ी जोड़कर एक श्रंखला में बंध आयें .... आप सभी के स्नेह और शुभ-कामनाएँ की हमेशा-हमेशा आकांक्षी रहूंगी ....


शुभ कामनाएँ ... हिंदी की बिंदी विश्व के मस्तक पर सुशोभित हो ...


सस्नेह 
सादर 
गीता पंडित 

2 comments: